अफगानिस्तान में पाकिस्तानी हाई लेवल डेलिगेशन को नहीं मिली लैंडिंग की इजाजत


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अफगानिस्तान (Afghanistan) के लिए पाकिस्तान (Pakistan) के विशेष प्रतिनिधि मोहम्मद सादिक ने गुरुवार को बताया कि काबुल के लिए स्पीकर की यात्रा को स्थगित कर दिया गया है, क्योंकि सुरक्षा खतरे के कारण हवाई अड्डे को बंद कर दिया गया था. यात्रा के लिए नई तारीखों का फैसला आपसी विचार-विमर्श के बाद लिया जाएगा.

काबुल. अफगानिस्तान में पाकिस्तान (Pakistan) को किरकिरी झेलनी पड़ी है. एक पाकिस्तानी संसदीय प्रतिनिधिमंडल को सुरक्षा खतरे के कारण लैंडिंग (Landing) की इजाजत नहीं मिली है. न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, जैसे ही विमान काबुल में उतरने वाला था, सुरक्षा खतरे के कारण यात्रा रद्द कर दी गई. अफगानिस्तान के लिए पाकिस्तान के विशेष प्रतिनिधि मोहम्मद सादिक ने गुरुवार को एक ट्वीट में लिखा, “काबुल के लिए स्पीकर की यात्रा को स्थगित कर दिया गया था, क्योंकि सुरक्षा खतरे के कारण हवाई अड्डे को बंद कर दिया गया था. हवाई अड्डे के बंद होने की सूचना मिलते ही विमान उतरने वाला था. यात्रा के लिए नई तारीखों का फैसला आपसी विचार विमर्श के बाद किया जाएगा.”

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, संसदीय सचिव असद क़ैसर के नेतृत्व में पांच सदस्यीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल, तीन दिवसीय यात्रा के लिए अफगानिस्तान जाने वाला था. इस दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए वार्ता होने वाली थी. हालांकि पूर्व पाकिस्तानी सीनेटर फरहतुल्लाह बाबर ने यात्रा के रहस्यमय तरीके से रद्द होने के समय पर सवाल उठाया है. बाबर ने एक ट्वीट में कहा, “लैंडिंग के समय सुरक्षा का खतरा पैदा हो गया था. क्या यात्रा को पहले से अनुमति नहीं मिली थी? यात्रा को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया था, नई तारीख दी गई. इसके लिए मेजबानों के द्वारा कोई पछतावा नहीं जताया गया है. यात्रा रद्द करने का निर्णय टावर ऑपरेटर द्वारा बताया गया. टावर से अतिथि के लिए बोलने वाले मेजबान के उच्च स्तरीय प्रतिनिधि के सामान्य प्रोटोकॉल को नजरअंदाज कर दिया गया. इसमें और भी बहुत कुछ है.”

एफएटीएफ द्वारा पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट में डालने की धमकी के रूप में इसे देखा जा रहा है. कनाडा के पूर्व राजदूत क्रिस अलेक्जेंडर ने इस्लामाबाद को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) द्वारा ब्लैकलिस्ट किए जाने का आह्वान करते हुए कहा है कि इमरान खान सरकार तालिबान और अन्य आतंकी संगठनों का समर्थन करना जारी रखती है. पिछले साल दिसंबर में, तालिबान के वरिष्ठ नेताओं के पाकिस्तान में अपने अनुयायियों और तालिबान लड़ाकों से मिलते हुए वीडियो की एक श्रृंखला सामने आई थी. वीडियो में, तालिबान के उप-नेता मुल्ला अब्दुल गनी बरादर, अफगानिस्तान के शांति वार्ता पर तालिबान कैडर के साथ वार्ता करते हुए और पाकिस्तान में तालिबान के शीर्ष नेतृत्व की उपस्थिति को स्वीकार करते हुए दिखाई दिए.

ये भी पढ़ें: पाकिस्तान: रेप पर बयान देकर बुरे फंसे इमरान, पूर्व पत्नी ने ट्वीट कर लगाई लताड़दिसंबर में, पाकिस्तान के पूर्व सीनेटर अफरासियाब खट्टक ने कहा कि पाकिस्तान तालिबान का इस्तेमाल अफगानिस्तान में अपने प्रभुत्व बढ़ाने के लिए एक “औजार” के रूप में कर रहा है. काबुल और तालिबान के बीच शांति वार्ता दोहा में सितंबर में शुरू हुई थी. दिसंबर की शुरुआत में, काबुल और तालिबान ने घोषणा की कि उन्होंने वार्ता की रूपरेखा पर सहमति व्यक्त की है, अब विचार-विमर्श के मुद्दों पर विचार-विमर्श करने की अनुमति है. हालांकि, अब तक बहुत कम प्रगति हुई है.







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