हिमाचल में नगर निगम चुनावः कांग्रेस को मिली संजीवनी, भाजपा की हालत हुई पतली


हिमाचल प्रदेश में चार नगर निगम चुनावों में कांग्रेस को संजीवनी मिली है. वहीं भाजपा का प्रदर्शन कमजोर रहा है.

हिमाचल प्रदेश के चार नगर निगमों में चुनावों के बाद आए परिणाम कांग्रेस के लिए संजीवनी साबित हो रहे हैं. वहीं सत्ता में काबिज भाजपा की हालत पतली नजर आई. सीएम जयराम ठाकुर की साख मंडी में तो बच गई लेकिन अन्य नगर निगमों में प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा.

  • Last Updated:
    April 8, 2021, 5:53 PM IST

शिमला. हिमाचल प्रदेश के चार नगर निगम के चुनाव (Elections in 4 municipal firms) परिणाम कांग्रेस के लिए संजीवनी साबित हो रहे हैं. वहीं सत्ता में काबिज भाजपा के लिए खतरे की घंटी की तरह नजर आ रहे हैं. CM जयराम ठाकुर (CM Jairam Thakur) की साख मंडी में तो बच गई लेकिन अन्य नगर निगमों में हालत खराब रही. नगर निगम चुनाव के परिणाम कई दिग्गजों की साख पर बट्टा लगा गए हैं.

सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि ये वैसी जीत नहीं है जैसा विपक्ष प्रचार कर रहा है. 2014 से अब तक भाजपा लगातार चुनाव जीत रही है, ये क्रम जारी रहेगा. सीएम सीधे तौर पर हार स्वीकार नहीं कर रहे हैं. वहीं कांग्रेस मुख्यालय में ढोल बज रहे हैं और कार्यकर्ता थिरक रहे हैं. पटाखे फोड़ रहे हैं. बीते साढ़े 3 सालों बाद चुनावों के मौसम में पहली बार ये नजारा कांग्रेस के दफ्तर में देखने को मिला है.

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर कहते हैं कि सत्ता पक्ष भले इन चुनावों को बता रहा हो, लेकिन माथे पर चिंता की लकीरें साफ नजर आ रही हैं. अपने साथी अनिल शर्मा को लताड़ने से मन थोड़ा हल्का जरूर हो रहा है. मंडी नगर निगम में सीएम के सहारे भाजपा की वैतरणी पार हो गई, लेकिन पालमपुर और सोलन में मुंह की खानी पड़ी.

चुनाव का पार्टियों पर क्या असर होगासोलन नगर निगम की बात करें तो कांग्रेस के दिग्गज राजेंद्र राणा का सियासी कद और ऊंचा हो गया. 2017 के विधानसभा  चुनावों में प्रेम कुमार धूमल को हराने वाले राणा ने यहां पर अपना चुनावी कौशल दिखाया और कांग्रेस की झोली में जीत खुशियों से भर दी. यहां से कांग्रेस विधायक धनीराम शांडिल की भी बल्ले-बल्ले हो गई. ज्यादा खुशी कांग्रेस को भी नहीं मनानी चाहिए, भाजपा से मात्र 2 सीटें ज्यादा हैं वो भी ऐसे समय में जब सोलन से विधायक कांग्रेस का है.

पालमपुर नगर निगम में भाजपा के दिग्गज और पूर्व सीएम शांता कुमार की खामोशी, भाजपा नेताओं का बड़बोलापन और ओवरकॉन्फिडेंस पार्टी को ले डूबा. यहां से भाजपा की दिग्गज नेत्री और राज्य सभा सांसद इंदू गोस्वामी का सियासी कद भी अब छोटा हो गया है. इन परिणामों से कांग्रेसी दिग्गज कौल सिंह ठाकुर का कद धर्मशाला नगर निगम में सीएम से लेकर केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने खूब जोर लगाया लेकिन फिर भी जनता ने पूरी तरह से जीत का जश्न मनाने से रोक दिया. कांग्रेस के जहाज को पूर्व कैबिनेट मंत्री सुधीर शर्मा, मेयर रहे जग्गी और सुखविंद्र सिंह सुक्खू की आपसी लड़ाई डूबो गई, राजनीतिक गलियारों में ऐसा चर्चा जोरों पर है.

मंडी की बात करें तो सीएम की साख जरूर बची है लेकिन अन्य नगर निगमों से आए परिणाम बुरी खबर लेकर आए हैं. मंडी में कांग्रेस का बेड़ा संभाल रहे पूर्व मंत्री जीएस बाली और विधायक विक्रमादित्य सिंह सीएम के चक्रव्यूह में बुरी तरह फंस गए और कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी. जीएस बाली के लिए ये परिणाम सियासी लिहाज से अच्छे नहीं माने जा रहे हैं.इन परिणामों से नजक आ रहा है कि जनता में स्थानीय मुद्दों का निपटारा न होने के अलावा महंगाई, बेरोजगारी, पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की बढ़ती कीमतों को लेकर खासा रोष है.







[GET MORE HINDI NEWS HERE : https://hindi.livenewsindia.net/ ]

Source hyperlink

Related Articles

BEST DEALS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest Articles